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Harinaam Sankirtan

Thursday, September 4, 2008

वाग्युद्ध - केलि- कुतुके व्रजराज - सूनुं
जित्वोन्मदामधिकदर्प- विकसि- जल्पाम्
फुल्लाभिरालिभिरनल्पमुदीर्यमाण-
स्तोत्रां कदा नु भवतीमवलोकयिष्ये ? ८
Posted by Rohit R at 5:16 PM

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